दिल तोड़ के दुश्वार है जीना इसे समझो, 
क्यों आ गया माथे पे पसीना इसे समझो

तुम को तो है मौजों पे ज्यादा ही भरोसा,
हिचकोले जो लेता है सफीना इसे समझो

इन आँखों में उठती हैं मोहब्बत की घटायें,
क्या कहता है सावन का महीना इसे समझो 

 तुम रखते हो नज़रें जो हैं हर हाल में रौशन,
जो हममे है मस्तूर बफीना इसे समझो 

ये सिर्फ बहारां है की पीने का है मौसम,
ये फूल हैं या सागरों मीना इसे समझो 

क्या हुस्न की तफसील में जाने की ज़रूरत, 
जो सामने है सरवे-सीमीना इसे समझो 

हम कहते थे हर एक से मिलना नहीं अच्छा,
शक हो गया जज़्बात का सीना इसे समझो 

आता है की जाता है कहाँ से ये कहाँ तक, 
किरनो ने बनाया हो जो ज़ीना इसे समझो 

जो तुममे चमक है वो इसी की है बदौलत, 
दिल मेरा है अनमोल नगीना इसे समझो

तुम भी तो 'सुहैल' उससे तलब करते हो बेजा,
उल्फत का भी होता है करीना इसे समझो 
_____________________________________सुहैल काकोरवी 

मस्तूर- छिपा हुआ, दफीना- खज़ाना, शक- फट जाना, बेजा- गलत, 
सरवे-सीमीना- चाँदी जैसे बदन व सर्व जैसे क़द वाला, 
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