उसको पसंद आया है दीन बेवफाई 
है मजहबे जफा की तज़ईन बेवफाई 

बातों से उसकी उठें ज़ख्मों से मेरे टीसें 
दिल कह रहा है इसको नमकीन बेवफाई 

 खुद को छिपा लिया है रंगे चमन में उसने 
वो कर रहा है मुझसे रंगीन बेवफाई 

 भीगीं है उसकी पलकें लेकिन खफा खफा है 
देखी है आज हमने ग़मगीन बेवफाई 

 उसकी गिरफ्त देखो उसकी उड़ान देखो 
गम्ज़े उकाब हैं और शाहीन बेवफाई 

अपना लिया के उस पर सौ जान से फ़िदा थी 
उसको भली लगी है शौकीन बेवफाई 

ऐसे ही उसने मुझ पर सौ तीर आज़माए
ज़ुल्मों सितम जफ़ाएं तौहीन बेवफाई 

तुम वैसा कर रहे हो और ऐसा चाहते हो 
हैं दो अलग ये किस्से तस्कीन बेवफाई 

चाहत की इन हदों पर अब हम सुहैल पहुंचे 
हम चाहते हैं उससे संगीन बेवफाई 

 ______________________________सुहैल काकोरवी ---------
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