वो बहारों से जब नाज़ फरमाएंगे 
फूल क़दमों से उनके लिपट जायेंगे 

गर्दिशे वक़्त है आज तक मुन्तजिर 
वो गए थे ये कह कर कि हम आएंगे 

कुछ नहीं है बजुज़ दिल सो टूटा हुआ 
हुस्न के पास क्या ले के हम जायेंगे 

तुम भी ढूँढओगे खुद में हमें हर घडी 
इस तरह अब तो हम तुमको तडपाएंगे 

इस तमन्ना में टूटे हज़ार आईने 
ज़ुल्फ़ उलझी है वो ज़ुल्फ़ सुलझाएंगे 

तेरी दुनिया में खुशबु बिखरने लगी 
वो 'सुहैल' आएंगे है यकीं आएंगे 
_______________________सुहैल काकोरवी 
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