दिलदार दिल की ठंडक जाने वफ़ा मोहब्बत,
ए हुस्न-ए-हर दो आलम मुझमे समा मोहब्बत.

ए सजदा गाहे आलम रौनक जहाँ की तुझसे,
सब कर रहे हैं तेरी हम्दो-सना मोहब्बत.

बुनियाद बन चुकी है हर दर्द का सबब है,
लेकिन मेरे लिए है बस इक दवा मोहब्बत.

मुझमे खिलाये तू ने नगमों के फूल कितने,
तू सौते सरमदी है ए खुशनवा मोहब्बत.

तेरे सिवा किसी का कब ध्यान दिल में आये,
तू हर दुआ है मेरी तू मुद्दआ मोहब्बत.

तारीकियों से मुझको महफूज़ रख खुदारा,
ए नूर की अलामत ए रहनुमा मोहब्बत.

अब तुझको हो गया है इरफ़ान जज्बे दिल का,
है कितनी खूबसूरत ये बरमला मोहब्बत.

जिनको निबाह करना आता नहीं जहाँ में,
बस वो समझ रहे हैं तुझको सज़ा मोहब्बत.

जो मुझको देखता है वो मुझको चाहता है,
मुझ पर दमक रही है तेरी अदा मोहब्बत.

लगती है चोट जिसको उसकी तड़प है लाज़िम,
हसने की बात क्या है ज़ुल्म आशना मोहब्बत.

इज़हार कर रहा है वो अपनी दिलबरी का,
तूफान आ रहा है मुझको बचा मोहब्बत.

कुछ और भी मिलेगा तुझसे सुकूं जहाँ को,
तू सीख ले गुलों से बाद-ए-सबा मोहब्बत.

अपने सुकूं की खातिर दुनिया तलाश में है,
होठों से उस हसीं के बाहर तो आ मोहब्बत.

वो मैकदे की जन्नत वो तेरी मस्त ऑंखें,
बस देख मेरी जानिब मुझको पिला मोहब्बत.

मेरी 'सुहैल' कोई पहचान और क्या हो,
मेरा वजूद उल्फत मेरा पता मोहब्बत.
____________________________सुहैल काकोरवी

 हुस्न-ए-हर दो आलम- ब्रह्मांडो का सौंदर्य, सजदा गाहे आलम- दुनिया के श्रधा से सर झुकाने की जगह, हम्दो-सना- इश्वर की महिमा, सौते सरमदी- दिव्य वाणी, खुश्नवा- मधुर वाणी वाला, लाज़िम- आवश्यक, ज़ुल्म आशना- निर्दयी, इरफ़ान- बोध, जज्बे दिल- मन की भावनाएं, इज़हार- प्रत्यक्ष, बाद-ए-सबा- सुबह की हवा, जानिब- ओर, उल्फत- स्नेह.





















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