इस बार ग़ालिब की मुश्किलतरीन ज़मीन में अशआर कहने में शेरगोई का इम्तेहान हो गया अब उसमें हम कामयाब हुए ये तो अहले नज़र दोस्त बताएँगे ;
ग़ालिब का मतला यूँ है ;
आ कि मेरी जान को क़रार नहीं है
ताक़ते बेदाद इन्तिज़ार नहीं है
और ये हैं मेरे अशआर;
उसको मोहब्बत का जो इक़रार नहीं है
पूरी तरह दिल अभी बेदार नहीं है
SHE DOES NOT ACCEPT THE LOVE AT PRESENT
HER HEART IS NOT AEAKENED AT THE MOMENT
उसके जो थे तौर हमें आ गए है अब
उसको किसी तौर अब क़रार नहीं है
I HAVE LEARNT HER STYLES AND ACTIONS
SO SHE GETS RESPITE NOT EVEN ONCE
मैंने कभी भी न लिए ज़ुल्म के बदले
दिल भी मेरा उसका रवादार नहीं है
I NEVER AVENGED OF HER MERCILESSNESS TO ME
AND MY HEART AS WELL DISALLOW THAT ENTIRELY
रेहमते बेपायां साथ मेरे है लेकिन
नूर है मौजूद यहाँ नार नहीं है
I HAVE WITH ME HIS UNFATHOMABLE BENEVOLENCE
SO FIRE OF HELL IS NOT BUT HERE IS HIS EFFULGE
चल पड़ा वो लाख कही मैंने यही बात
राहे वफ़ा देख उस्तुवार नहीं है
SHE SET OFF THOUGH I WARNED REPEATEDLY
THAT PATH OF LOVE IS UNEVEN NOT EASY
कहने पे मजबूर किया साक़ी ने मुझको
आज ये कुछ और है खुमार नहीं है
THE FRIENDLINESS OF BARMAID COMPELLED ME TO SAY
THAT IT NOT INTOXICATION NOT HANGOVER NAY

उसने सुहैल आज बुलाया है मुझे घर
जाने को दिल किसलिए तैयार नहीं है
BELOVED HAS CALLED ME PERHAPS LOVINGLY
BUT MY HEAT TO GO THERE IS NOT READY
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