तू फहम से है आगे जलवा नुमा मोहम्मद
वो कौन है जो पाए तेरा पता मोहम्मद.

जिस अक्स का तसव्वुर सौ तूर फूँक डाले,
उस अक्स का अकेला हैं आइना मोहम्मद.

 तुझपर सलाम भेजे खुद खालिके-दो-आलम,
किसकी सना है इससे बढ़कर सना मोहम्मद.

अपने अमल की जानिब हम देखते नहीं हैं,
चश्मे करम है तेरी बस आसरा मोहम्मद.

खुलके अज़ीम है तू अजमे समीम है तू,
अल्फाज़ तेरे शीरीं ए खुश-अदा मोहम्मद.

तुझसे गुलों में रंगत बाद-ए-सबा में ठंडक,
गुलज़ार दिल को करदे चेहरा तेरा मोहम्मद.

वो अफवो दर-गुज़र हो वो रहम और करम हो,
कौनो मकाँ ने सीखी तुझसे वफ़ा मोहम्मद.

तकमीले हुस्न देखें महबूब-ए-रब्बे आलम,
बस दिल मेरे आ जा कह कर अना मोहम्मद. 

जिसने दिलों को जीता जो सब्र का है पैकर, 
वो रहनुमा है मेरा तेरा "ज़िया" मोहम्मद.

बख्शी 'सुहैल' को है तू ने ही खुशनवाई,
बस तुझको चाहने से ये हो गया मोहम्मद.
  _____________________________________सुहैल काकोरवी 

मोहब्बत पर ग़ज़ल अज़ीज़ी तौसीफ से टाइप करा रहे थे उन्होंने मोहब्बत की जगह मोहम्मद टाइप किया जो एक बशारत थी. फिर बिरादरे रूहानी अज़ीज़ी असद आमिर ने बिलकुल वही फरमाइश कर दी और फज्ल के बदल बरसने लगे कदम-ए-नबवी पर ये फूल निछावर कर दिए.
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