हम सोच रहे थे उनको अभी वो पर्दा उठा कर आ भी गए

वो फूल महब्बत के हमपर अज़राहे करम बरसा भी गए

आये थे इलाजे दिल करने फितरत के मुताबिक़ काम किया
कुछ और बढ़ाया दर्द मेरा वो और मुझे तड़पा भी गए

उम्मीद दिलाई साक़ी ने आएगी घटा तो देखेंगे
क़िस्मत ने हमारा साथ दिया बेमौसम बादल छा भी गए

कुछ नाम लिए,कुछ दर्द कहे ,रुखसत हुए लेकर मेरा सुकूँ
अफ़साने सुनाये मुझको नए वो आग नई भड़का भी गए

क़ुरबत में बहोत से इम्काँ हैं ये बात समझ में आयी हमें
हालात से वो मजबूर हुए हालात से धोखा खा भी गए

इज़हार के नाज़ुक लम्हों का आलम बस इतना कहना काफी है
जो कह गए वो उम्मीद न थी वो आँख मेरी छलका भी गए

मैंने तो सुहैल अपने दिल की मौहूम तमन्ना ज़ाहिर की
रुख़्सार पे बिजली सी चमकी इस बात पे वो इठला भी गए

0 Responses

Post a Comment