आयेगा वो मिलने दिल-ए-वीरां से कहूँगा
बदलेंगी हवाएँ ये गुलिस्तां से कहूँगा
रख ले वो भरम इश्क की शोरीदासरी का,
हंगाम-ए-जुनू अपने गरीबां से कहूँगा.
मुझको वो खबर दे कि जो फूलों से भरी हो
ये जुम्बिश-ए-लबहाय बहारां से कहूँगा.
वो तेज़ खिराम आज न जाये कहीं बचकर,
ये शोखिये रफ़्तार-ए-गिज़ाला से कहूँगा.
जो कुछ है वो है इश्क का आईने मोअल्ला,
काफ़िर से कहूँगा ये मुसलमाँ से कहूँगा.
मौजों के मज़े लेता है नाज़ुक है मेरा यार,
थम जाये अभी इश्क के तूफां से कहूँगा
बढती चली जाती है हवादिस की कड़ी धूप,
साया वो करे यार यार के दामां से कहूँगा
मै देख के उस हुस्न को हैरान में पड़ा हूँ,
रुक जाये अभी गर्दिश-ए-दौरां से कहूँगा
मिट जाये कि जो मुझमे सियाही है अना की,
ये बात सुहैल उस रुखे ताबां से कहूँगा
______________________________ ____सुहैल काकोरवी
शोरीदासरी- पागलपन, जुम्बिश-ए-लबहाय बहारां - बहारों के होटों का हिलना, तेज़ खिराम- तेज़ चलने वाला,
रफ़्तार-ए-गिज़ाला- हिरणों की चाल, आईने मोअल्ला- बड़ा कानून, हवादिस- दुर्घटना, गर्दिश-ए-दौरां- वक़्त के चक्कर,
अना- अहंकार, रुखे ताबां- चमकता हुआ चेहरा.सो कहूंगा

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